February 17, 2018

जो मेरी आँख कह रही तुझसे,
क्यूँ तेरा दिल समझ नहीं पाया!

© सन्तोष पुरस्वानी सन्त
८-१-२०१८ 

jo merii aa'nkh keh rahii tujhse,
kyu'n tera dil samajh nahii'n paaya.

© Santosh Purswani Sant
8-1-2018

February 14, 2018

हृदय में सबके रस जो घोले, ऐसा मंत्र सुनाएँ,
बस मानवता की बानी बोले, ऐसा यंत्र बनाऐं।

जात पात से ऊपर उठ कर देश प्रेम में रम जाएँ,
प्यार मुहब्बत से आओ मिलकर गणतंत्र मनाऐं।

© सन्तोष पुरस्वानी सन्त
२६-१-२०१८ 

hridey mei'n sabke ras jo ghole, aisa mantra sunaaye'n,
bas maanavta ki baani bole, aisa yantra banaaye'n.

jaat paat se upar uth kar desh prem mei'n ram jaaye'n,
pyaar muhabbat se aao mil kar gan-tantra manaaye'n.

© Santosh Purswani Sant
26-1-2018


February 08, 2018

सोच ही तो ज़ुबां पे आती है,
होंठ ख़ुद से तो कुछ नहीं कहते!

© सन्तोष पुरस्वानी सन्त
८-१२-२०१७

soch hi to zubaa'n pe aati hai,
hon'th khud se to kuchh nahi'n kehte.

© Santosh Purswani Sant
8-12-2017