November 02, 2017

शब् भर जागे नींद न आई,
शब् भर तेरी याद जलाई!

© सन्तोष पुरस्वानी सन्त
३-३-२०१६

shab bhar jaage nee'nd na aayee,
shab bhar teri yaad jalaayee.

© Santosh Purswani
3-3-2016

November 01, 2017

कहीं  पलकें  न  जाम  हो  जाएँ,
ख़्वाब को आँख में न रुकने दो!

© सन्तोष पुरस्वानी सन्त
१८-५-२०१७

kahee'n  palke'n  na  jaam  ho  jaye'n,
khwaab ko aa'nkh mei'n na rukne do.

© Santosh Purswani Sant
18-5-2017

October 05, 2017

ख़ुश्क़ आँखें ले कर कल शब् सोये थे,
अब सोच रहे हैं तकिया कैसे भीग गया!

© सन्तोष पुरस्वानी सन्त 
३०-६-२०१७ 

khushq aa'nkhe'n le kar kal shab soye the,
ab soch rahe hai'n takiya kaise bheeg gaya.

© Santosh Purswani Sant
30-6-2017