September 12, 2017

इस दौर के शोर - शराबे में,
यही बेहतर है ख़ामोश रहें।

© सन्तोष पुरस्वानी सन्त
21-7-2017

is dour ke shor - sharaabe mei'n,
yahi behtar hai khaamosh rahe'n.

© Santosh Purswani Sant
21-7-2017

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