November 01, 2017

कहीं  पलकें  न  जाम  हो  जाएँ,
ख़्वाब को आँख में न रुकने दो!

© सन्तोष पुरस्वानी सन्त
१८-५-२०१७

kahee'n  palke'n  na  jaam  ho  jaye'n,
khwaab ko aa'nkh mei'n na rukne do.

© Santosh Purswani Sant
18-5-2017

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