March 01, 2018

Na wo raate'n na wo baate'n na wo kissa kahaani hai,
Tumhari yaad apne dil se ab hamko mitaani hai.
Nikal jayega yu'n hi dam tadap kar khud b khud mera,
Ki zanjeere'n hai'n pairo'n mei'n qafas mei'n zindagani hai.
Bayaa'n karta hu'n tumse aaj haal e dil mere hamdam,
Agar maano haqeeqat hai na maano to kahaani hai.
Hai surat ye ki ab hansna bahut mushkil hua mera,
Mere haatho'n mei'n ye tasweer ik arsaa puraani hai.
Zara tum ghour se dekho, dikhenge khwaab kuchh doobe,
Meri palko'n pe khushki hai magar aankho'n mei'n paani hai.
Agar thaani hai jaane ki, khato'n ko phadte kyu ho,
Rahu'n mai'n zinda is khaatir zaruri ye nishaani hai.

© Santosh Purswani Sant 
24-5-2016

न वो रातें, न वो बातें, न वो क़िस्सा कहानी है,
तुम्हारी याद अपने दिल से अब हमको मिटानी है।
निकल जाएगा यूँ ही दम तड़प कर ख़ुद ब ख़ुद मेरा,
कि ज़ंजीरें हैं पैरों में, क़फ़स में ज़िन्दगानी है।
बयाँ करता हूँ तुमसे आज हाल ऐ दिल मेरा हमदम,
अगर मानो हक़ीक़त है, न मानो तो कहानी है।
है सूरत ये कि अब हँसना बहुत मुश्किल हुआ मेरा,
मेरे हाथों में ये तस्वीर इक अरसा पुरानी है।
ज़रा तुम ग़ौर से देखो, दिखेंगे ख़्वाब कुछ डूबे,
मेरी पलकों पे ख़ुश्क़ी है मगर आँखों में पानी है।
अगर ठानी है जाने की, ख़तों को फाड़ते क्यूँ हो,
रहूँ मैं ज़िन्दा इस ख़ातिर ज़रूरी ये निशानी है।
© सन्तोष पुरस्वानी सन्त
२४-५-२०१६

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